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Tuesday, 20 February 2018

फूलों का गीत

01:35 0 Comments

फूल जगत के हैं हम प्यारे,
रूप रँग में न्यारे न्यारे।

काम हमारा है मुस्काना,
सुन्दर पास पड़ोस बनाना।

ओस सुबह की नहला देती,
तितली आन बलैया लेती।

भौंरे गान सुना जाते हैं,
जहाँ हमें फूला पाते हैं।

पाठ प्रेम का पढ़ते आला,
एक बनाते हम मिल माला।

सदा मेल से शोभा पाते, 
भेद भाव हम दूर भगाते।

चढ़े सिरों पर आदर पावें,
या सड़कों पर कुचले जावें।

कभी न मुख पर दुःख लावेंगे,
हर हालत में मुस्कावेंगे।

खिलें बाग में या घूरे पर,
हम लेते हैं प्रण पूरे कर।

यानि हँसते औ' मुस्काते,
सुन्दर पास पड़ोस बनाते।

लेखक -श्रीनाथ सिंह

कहो मत करो

01:29 0 Comments

सूरज कहता नहीं किसी से,
मैं प्रकाश फैलाता हूँ।
बादल कहता नहीं किसी से,
मैं पानी बरसाता हूँ।
आंधी कहती नहीं किसी से,
मैं आफत ढा लेती हूँ।
कोयल कहती नहीं किसी से,
मैं अच्छा गा लेती हूँ।
बातों से न, किन्तु कामों से,
होती है सबकी पहचान।
घूरे पर भी नाच दिखा कर,
मोर झटक लेता है मान।

लेखक -श्रीनाथ सिंह